के. एस. कृष्णन
सन 1955 में यू.एस. नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज ने के.एस. कृष्णन को अतिथि भाषणकर्ता के तौर पर अपने वार्षिक रात्रि भोज में निमंत्रित किया- यह किसी भी वैज्ञानिक के लिए बहुत सम्मान की बात है| और कृष्णन ने सबकी आशा से अधिक सफलता पाई| उन्होंने बताया कि विज्ञान और तकनीकी के माध्यम से भारत अपनी संस्कृति में क्या-क्या परिवर्तन करेगा| भारतीय संस्कृति, धर्म ,दर्शन और विज्ञान के अनेक विषयों के गहरे ज्ञान से उन्होंने अमेरिका के विख्यात वैज्ञानिकों को सम्मोहित सा कर लिया |
बाद में एक प्रमुख भौतिक शास्त्री ने टिप्पणी की, " कृष्णन ने ए. एम. वाइटहेड (विख्यात अंग्रेज गणितज्ञ और दार्शनिक )से बहुत उद्धृत किया था और उसके भाषण नहीं मुझे वाइटहेड की पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया|" कृष्णन केवल वैज्ञानिक ही नहीं थे, वह भौतिक शास्त्री एवं दार्शनिक थे| उन्हें संस्कृत, अंग्रेजी और तमिल साहित्य का भी उतना ही ज्ञान था जितना भौतिकी का |
करियामणिक्कम श्रीनिवास कृष्णन का जन्म 4 दिसंबर सन 1898 में तमिलनाडु में हुआ था |उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मद्रास में प्राप्त की|फिर वह सन 1920 में शोध कार्य करने के लिए कोलकाता चले गए| यहां पर उन्होंने ऑप्टिक्स के क्षेत्र में सी .वी. रमन के नेतृत्व में अनुसंधान करने के लिए इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टीवेशन साइंस में प्रवेश लिया| कहा जाता है कि रमन इफेक्ट की खोज में उनका भी योगदान था सन 1948 में दिल्ली की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के प्रथम निदेशक बने|
कृष्णन सदा अपने छात्रों से कहते थे "भौतिकी का अर्थ है तथ्यों का सामना करना|" भौतिकी में में उनका योगदान विविध क्षेत्रों में है| क्रिस्टल में मौजूद सुंदर संयोजन सपने देखे होंगे| यह पैटर्न या मॉलिक्यूल की उपलब्धता के कारण बनते हैं| विविध संगठनों से अलग अलग पैटर्न बनते हैं|सॉलिड स्टेट भौतिकी किसी ठोस पदार्थ में ऐसे संयोजन एवं उनसे होने वाली क्रियाओं का अध्ययन है| कृष्णन ने ठोस पदार्थों में अणु की सुंदरता का तथा उन शक्तियों का अध्ययन किया जो ऑडियो या परमाणु को इस तरह व्यवस्थित रखती है|
उन्होंने इस बात का भी अध्ययन किया कि ठोस पदार्थ के विविध रूपों जैसे छड़ या कॉल जब वैक्यूम में गर्म किए जाते हैं तो ऊष्मा उनमें कैसे वितरित होती है| इसका औद्योगिक उत्पादन में काफी उपयोग है |थर्मोनिक्स ( तापायनिक)- किसी गर्म पदार्थ से निकलने वाले इलेक्ट्रॉन के व्यवहार और नियंत्रण प्रक्रिया का अध्ययन- इस क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है |
कृष्णन को बहुत बार सम्मानित किया गया और सन 1940 में रॉयल सोसाइटी का सदस्य चुना गया| उनकी मृत्यु सन 1961 में हुई |
सन 1955 में यू.एस. नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज ने के.एस. कृष्णन को अतिथि भाषणकर्ता के तौर पर अपने वार्षिक रात्रि भोज में निमंत्रित किया- यह किसी भी वैज्ञानिक के लिए बहुत सम्मान की बात है| और कृष्णन ने सबकी आशा से अधिक सफलता पाई| उन्होंने बताया कि विज्ञान और तकनीकी के माध्यम से भारत अपनी संस्कृति में क्या-क्या परिवर्तन करेगा| भारतीय संस्कृति, धर्म ,दर्शन और विज्ञान के अनेक विषयों के गहरे ज्ञान से उन्होंने अमेरिका के विख्यात वैज्ञानिकों को सम्मोहित सा कर लिया |
बाद में एक प्रमुख भौतिक शास्त्री ने टिप्पणी की, " कृष्णन ने ए. एम. वाइटहेड (विख्यात अंग्रेज गणितज्ञ और दार्शनिक )से बहुत उद्धृत किया था और उसके भाषण नहीं मुझे वाइटहेड की पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया|" कृष्णन केवल वैज्ञानिक ही नहीं थे, वह भौतिक शास्त्री एवं दार्शनिक थे| उन्हें संस्कृत, अंग्रेजी और तमिल साहित्य का भी उतना ही ज्ञान था जितना भौतिकी का |
करियामणिक्कम श्रीनिवास कृष्णन का जन्म 4 दिसंबर सन 1898 में तमिलनाडु में हुआ था |उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मद्रास में प्राप्त की|फिर वह सन 1920 में शोध कार्य करने के लिए कोलकाता चले गए| यहां पर उन्होंने ऑप्टिक्स के क्षेत्र में सी .वी. रमन के नेतृत्व में अनुसंधान करने के लिए इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टीवेशन साइंस में प्रवेश लिया| कहा जाता है कि रमन इफेक्ट की खोज में उनका भी योगदान था सन 1948 में दिल्ली की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के प्रथम निदेशक बने|
कृष्णन सदा अपने छात्रों से कहते थे "भौतिकी का अर्थ है तथ्यों का सामना करना|" भौतिकी में में उनका योगदान विविध क्षेत्रों में है| क्रिस्टल में मौजूद सुंदर संयोजन सपने देखे होंगे| यह पैटर्न या मॉलिक्यूल की उपलब्धता के कारण बनते हैं| विविध संगठनों से अलग अलग पैटर्न बनते हैं|सॉलिड स्टेट भौतिकी किसी ठोस पदार्थ में ऐसे संयोजन एवं उनसे होने वाली क्रियाओं का अध्ययन है| कृष्णन ने ठोस पदार्थों में अणु की सुंदरता का तथा उन शक्तियों का अध्ययन किया जो ऑडियो या परमाणु को इस तरह व्यवस्थित रखती है|
उन्होंने इस बात का भी अध्ययन किया कि ठोस पदार्थ के विविध रूपों जैसे छड़ या कॉल जब वैक्यूम में गर्म किए जाते हैं तो ऊष्मा उनमें कैसे वितरित होती है| इसका औद्योगिक उत्पादन में काफी उपयोग है |थर्मोनिक्स ( तापायनिक)- किसी गर्म पदार्थ से निकलने वाले इलेक्ट्रॉन के व्यवहार और नियंत्रण प्रक्रिया का अध्ययन- इस क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है |
कृष्णन को बहुत बार सम्मानित किया गया और सन 1940 में रॉयल सोसाइटी का सदस्य चुना गया| उनकी मृत्यु सन 1961 में हुई |




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