भारतीय वैज्ञानिक : पंचानन माहेश्वरी

शुक्रवार, 19 जून 2020

पंचानन माहेश्वरी

                पंचानन माहेश्वरी 

भारत में सदियों से बड़े बड़े वैज्ञानिको ने जन्म लेकर भारत का नाम ऊँचा किया | उन्ही वैज्ञानिकों में से एक नाम है - पंचानन माहेश्वरी|

            पंचानन माहेश्वरी का जन्म 9 नवंबर सन 1904 में जयपुर राजस्थान में हुआ |उनके पिता लिपिक थे मगर उनकी इच्छा थी कि अपने बेटे को अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलवाएं | उनके पिता ने उन्हें जीवन अनुशासित तरीके से बिताने कि शिक्षा दी | वह स्वयं देर तक काम करते जिससे पंचानन माहेश्वरी के लिए तरह तरह कि किताबें खरीद सकें | उनके घर में सदा  एक छोटी सी प्रयोगशाला रही जिसमे वह अपने शोध कार्य करते थे |
         इलाहबाद विश्वविद्यालय के इविंग क्रिश्चियन कॉलेज में जुलाई सन 1921 में बी.एस सी. में इन्होने प्रवेश लिया | उस समय विश्वविद्यालय में विनफिल्ड नामक अमेरिकन मिशनरी व विख्यात वनस्पति शास्त्री, विभाग के अध्यक्ष व भारतीय वनस्पति शास्त्र सोसायटी के संस्थापक भी थे | यद्यपि छात्र उन्हें सम्मान देते थे मगर कठोर होने के नाते उनसे डरते भी थे | उन्हें प्रसन्न करना कठिन था | लेकिन पंचानन माहेश्वरी में उन्हें वह छात्र मिला जिसकी उन्हें अब तक खोज थी |
          विनफिल्ड पौधों की किस्मे एकत्र करने के लिए पंचानन माहेश्वरी को अभियानों पर लें जाते और यात्रा के दौरान उन्हें प्लांट मॉर्फोलॉजी के मूल सिद्धांत समझाते |
          एम. एस सी. करने के बाद पंचानन माहेश्वरी ने विनफिल्ड के मार्गदर्शन में शोध कार्य आरम्भ किया | उन्होंने एंजियोस्पर्म का आकृति विज्ञान, एनाटमी और भ्रूण विज्ञान का अध्ययन किया |
            पंचानन माहेश्वरी ने एंजियोस्पर्म की कई जातियों में बढ़ने की प्रक्रिया का अध्ययन किया | उन्होंने भ्रूण सम्बन्धी अध्ययन परीक्षण के दौरान पाई जाने वाली भिन्नता के आधार पर इन पौधों का वर्गीकरण भी किया|
           सन 1931 में माहेश्वरी ने डी .एस सी.  को डिग्री भी प्राप्त कर ली |इलाहबाद विश्वविद्यालय छोड़ने से पहले वह विनफिल्ड की अपना आभार प्रकट करने के लिए मिले|
            पंचानन माहेश्वरी लगातार अथक परिश्रम करते रहे | बीरबल साहनी मेडल मिलने के साथ साथ उन्हें सुंदरलाल होरा मेमोरियल मेडल भी मिला और सन 1965 में रॉयल सोसायटी के सदस्य चुने गए |
              सन 1949 में पंचानन माहेश्वरी को दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति शास्त्र विभाग का अध्यक्ष बनने का निमंत्रण मिला | वह इस बात पर दृढ प्रतिज्ञ थे कि अपने छात्रों को भ्रूण विज्ञान में दिलचस्पी लेने के लिए तैयार करेंगे | यह उनका स्वयं का शोध क्षेत्र था | उस समय यह विषय थोड़ा उपेक्षित था|¢उन्होंने इस क्षेत्र में शोधकार्य करने का निश्चय किया मगर महंगे उपकरण का उपयोग नहीं किया |उनके प्रयास को सफलता मिली|वनस्पति शास्त्र विभाग कि प्रगति ही नहीं हुई बल्कि विदेश में भी उसका नाम हो गया | और स्थानों के वैज्ञानिक भी इस क्षेत्र में शोधकार्य करने लगे | पंचानन माहेश्वरी को आधुनिक भ्रूण विज्ञान का प्रवर्तक कहा जा सकता है |

               उन्हीने ही एंजियोस्पर्म पौधों में टेस्ट ट्यूब तकनीक कि प्रक्रिया का आविष्कार किया |तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि फूल वाले पौधों का निषेचन टेस्ट ट्यूब में भी हो सकता है |
              माहेश्वरी ने दो प्रामाणिक पुस्तकें एन इंट्रोडक्शन टू दी एम्ब्र्योलॉजी ऑफ़ एंजियोस्पर्म और रिसेंट एडवांसेज इन एम्ब्र्योलॉजी ऑफ़ एंजियोस्पर्म लिखी है |
           सन 1951 में उन्होंने इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ़ प्लांट मॉर्फोलॉजिस्ट्स नामक संस्था कि स्थापना की |  18 मई सन 1966 में जब उनका देहांत हुआ तब तक वह फायटो मॉर्फोलॉजी नामक पत्रिका का संपादन करते रहे |





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