जगदीश चंद्र बोस
10 मई सन 1901 की बात है रॉयल सोसायटी लंदन, का हाल प्रसिद्ध वैज्ञानिको से ठसाठस भरा हुआ था | वे सब जगदीश चंद्र बोस का यह प्रयोग देखने आये थे की पेड़ पौधों में भी संवेदना होती है | उन्होंने जितने प्रयोग परिक्षण किये थे उसमे से एक यह भी था | एक अत्यंत संवेदनशील उपकरण ( बोस का एक अपना आविष्कार ) जो पौधे के स्पंदन मापन के लिए था, एक पौधे से जोड़ दिया गया | पौधे को उसकी जड़ों समेत, तने तक एक ऐसे बर्तन में जिसमे ब्रोमाइड विष भरा था डुबो दिया गया | बोस आशा के साथ स्क्रीन पर हल्के धब्बों को देख रहे थे जो पौधे के स्पंदन का संकेत करते थे | सब लोगो की दृष्टि भी वहीं टिकी थी |
पौधे के नब्ज की धड़कन, जिसे वह बिंदु पहले घड़ी के पेंडुलम की नियमितता से आगे पीछे अंकित कर रहा था ,धीरे -धीरे अनियमित और असंतुलित होने लगा और फिर एकाएक उसकी क्रियाएं अचानक रुक गयीं | पौधा जहर के कारण मर गया था |
इस प्रयोग के अंत में हर्षध्वनि हुई | इस प्रयोग द्वारा बोस ने यह साबित कर दिया कि पौधों में भी जीवन होता है |
बोस का जन्म 30 नवंबर 1858 में मैमनसिंह जिले में हुआ था यह जिला अब बांग्लादेश में है | बोस का बचपन ऐसे घर में बीता जो भारतीय परम्परा और संस्कृति में डूबा हुआ था |
जब उन्होंने सेंट जैवियर स्कूल , कलकत्ता में प्रवेश लिया तो उन्हें अंग्रेज और एंग्लो - इंडियन लड़को की संगति मिली | गाँव के लड़के को अपने बीच पाकर उन लोगो को बहुत अजीब लगता था |
सन 1885 में वह विदेश से बी. एससी . और प्रकृति विज्ञान में ट्रिपास की डिग्री लेकर देश लौटे | उन्हें प्रेसिडेंसी कॉलेज कलकत्ता में प्राध्यापक पद देने की बात हुई लेकिन उनका वेतन उनके अंग्रेज साथियों से आधा रखा गया | उन्होंने पद तो स्वीकार कर लिया मगर विरोध के तौर पर वेतन लेने से इंकार कर दिया |तीन वर्ष बाद कॉलेज के मुख्य अध्यापक ने जो एक अंग्रेज था, उनकी प्रतिभा को देखकर उनकी मांगे मान लीं |बोस ने इस तरह अन्याय के विरुद्ध कठिन संघर्ष करना सीखा |
दो वर्ष के अथक परिश्रम के बाद उन्होंने एक मोनोग्राफ प्रकाशित किया, नाम था -- ' रिस्पांस इन दी लिविंग एंड नॉन लिविंग ' जिसने रॉयल सोसायटी को आश्वस्त कर दिया की वह ठीक थे | बोस विश्व विख्यात वैज्ञानिक बन गए | कई सम्मानों के अतिरिक्त 1920 में उन्हें रॉयल सोसायटी का सदस्य बना लिया गया |
यद्यपि बोस जीव विज्ञानी के रूप में अधिक प्रसिद्ध हैं लेकिन वह महान भौतिक शास्त्री भी थे | सही अर्थो में बेतार के तार के आविष्कारक वहीं थे | उन्होंने सन 1895 में मारकोनी द्वारा अपने आविष्कार को पेटेंट कराने से भी एक वर्ष पहले ही वह इस उपकरण का सार्वजनिक प्रदर्शन कर चुके थे| वह प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने माइक्रो वेव्स का उपयोग किया |
बोस ने ही अति संवेदनशील कोहियरर उपकरण बनाया जो रेडियो वेव्स का पता लगाता है | बाद में बोस ने क्रेस्कोग्राफ का आविष्कार किया जो पौधों की वृद्धि का पता लगाता है |
बोस ने 23नवंबर सन 1937 को अपनी मृत्यु से पहले कलकत्ता में बोस इंस्टिट्यूट की स्थापना की | उस समय यहाँ मुख्यतः पौधों पर ही अध्ययन किया जाता था | आजकल इंस्टिट्यूट में कई सम्बंधित विषयों पर शोध कार्य चल रहा है |

Great scientist...
जवाब देंहटाएं