अपने परामर्शदाता होमी जहांगीर भाभा से उन्होंने सीखा कि भारत जैसे देश में भी अगर अच्छी कार्यप्रणाली और संगठन हो और कार्यक्षेत्र का चुनाव सावधानी से किया गया हो तो ऊंचे स्तर का शोध कार्य संभव है| उन्होंने इस देश को इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतरिक्ष किरण भौतिकी के क्षेत्र में अन्य अग्रणी देशों के समकक्ष खड़ा कर दिया|
एक वैज्ञानिक प्रशासक के रूप में उन जैसे व्यक्ति की भारत जैसे विकासशील देश को बहुत आवश्यकता है|
मेनन का जन्म 28 अगस्त सन 1928 में कर्नाटक के मंगलौर जिले में एक डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज के घर में हुआ| मूल शिक्षा देश के विभिन्न भागों में मिली| इसके पश्चात 1941 में उन्होंने ब्रिस्टल विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया| वहां उन्होंने सी. एफ. पावेल के अधीन शोध कार्य किया| और कुछ मूल कणों की खोज की| उनमें विभिन्न ऊर्जाओं के कण और विशेष वर्ग के पियोन्स थे|
सन 1955 में वह देश वापस लौटे और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में काम करने लगे| यहां रहकर उन्होंने भारत में बहुत ऊंचाई पर भू चुंबकीय भूमध्य रेखा के निकट और कोलार में सोने की खानों में बहुत गहराई पर अंतरिक्ष किरणों के बारे में अध्ययन किया|
मेनन को कई बार सम्मानित किया गया और कई पुरस्कार मिले| सन 1960 में उन्हें एस.एस. भटनागर अवार्ड मिला और 1970 में वह रॉयल सोसाइटी के सदस्य चुने गए| अनुसंधान के अतिरिक्त उन्हें चित्रकला, बागवानी और मूर्तिकला से बहुत प्रेम है| सन 1986 के आरंभ में वह प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त हुए|
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